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...तो सोमनाथ भारती का छापा मारना ठीक था!
08 Feb 2014

 

नई दिल्ली: तो क्या दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती का खिड़की एक्सटेंसन में छापेमारी करना सही था? यह सवाल इस लिए उठ रहा है क्योंकि, आज खिड़की एक्सटेंशन में अपने देश की महिलाओं को देह-व्यापार के धंधे में धकेलनी वाली एक युगांडा की महिला को गिरफ्तार किया गया है। इस महिला को वहीँ से गिरफ्तार किया गया है जहां पिछले दिनों राज्य के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने दिल्ली पुलिस को सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए छापेमारी करने को कहा था। लेकिन, पुलिस ने उनके आदेशों की अवहेलना की थी।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार खिड़की एक्सटेंसन के उसी माकन से एक युगांडा की महिला को गिरफ्तार किया गया हैं जहां बिना सर्च वारंट के सोमनाथ भारती सेक्स-रैकेट का खुलासा करने हेतु छापेमारी करने पहुंचे थे और पुलिस से उनकी कहा-सुनी भी हो गई थी। गिरफ्त में आई महिला की पहचान नाबाकुला के रूप में हुई है। गिरफ्त में आई महिला ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया है कि, वह अपने देश की महिलाओं को अच्छी नौकरी दिलाने के बहाने भारत लाती थी और यहां उन्हें ड्रग्स माफियों के हवाले कर देती थी और उन्हें देह-व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था।
 
मामले में पुलिस उपायुक्त दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व नीला मोहनन ने गिरफ्त में आई महिला का बयान दर्ज कर लिया हेयर और मालवीय नगर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कर ली गई है। बताया जा रहा है कि, शुक्रवार को खिड़की एक्सटेंशन में छापे के दौरान नबाकुला नामक महिला को पकड़ा गया। बताया जाता है कि नबाकुला को उसी भवन से गिरफ्तार किया गया जहां बिना तलाशी वारंट के आधी रात को छापा मारने के विषय पर दिल्ली के सोमनाथ का कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों कहासुनी हुई थी।
 
आरोपी महिला को शुक्रवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने महिला पर आरोप लगाया है कि उसने अन्य महिलाओं को वेश्यावृत्ति में धकेलने के लिए उनके पासपोर्ट आदि छीन लिए। अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। युगांडाई उच्चायोग इस मामले की जांच पर कड़ी नजर रख रहा है।
 
अब दिल्ली पुलिस की कार्यवाई को ठीक माना जाए अथवा सोमनाथ भारती की? जो भी हो एक बार देश की सबसे अच्छी पुलिस माने जाने वाली दिल्ली पुलिस के दावों की पोल जरूर खुल गई है। एक तो दिल्ली पुलिस असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाने में नाकाम रहती है। यदि उसकी मदद कोई करना भी चाहता है तो वह उससे भी भीड़ जाती है। ऐसे में यह समझ में नहीं आता कि, दिल्ली पुलिस की संवेदनशीलता आखिर कहां चली गई है? यदि पिछले दिनों जब सोमनाथ ने दिल्ली पुलिस को उक्त जगह छापा मारने को कहा था और पुलिस ने छापेमारी की होती तो शायद कई महिलाओं की जिन्दगी बच सकती थी।

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