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बिहार की ‘आप’ नेता परवीन अमानुल्लाह का दामन भी दागदार
08 Feb 2014

 

पटना: हाल में बिहार राज्य की पूर्व मंत्री परवीन अमानुल्लाह का दामन भी दागदार है। लेकिन, ‘आप’ को इस बात की परवाह नहीं है। परवीन के दामन पर पर एक नहीं बल्कि, कई दाग है। जिस 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन और कोल ब्लॉक आवंटन में शामिल हर शख्स को केजरीवाल खुलेआम करप्ट या फिर चोर कहते हैं ठीक इसी पैटर्न पर बिहार के 2जी घोटाले के नाम से मशहूर BIADA जमीन आवंटन मामले में परवीन अमानुल्लाह आरोपों के घेरे में रही हैं।

 

मिली जानकारी के मुताबिक, जिस वक्त परवीन मंत्री थीं, उस समय उन्होंने अपनी बेटी को करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव में अलॉट किए गए थे। इतना ही नहीं परवीन पर बदमीजाजी और खुलेआम रिश्वत मांगने के मुकदमे भी दर्ज हैं। सबसे बड़ी बात यहां पर यह है कि, अक्सर लोगों को सवालों के घेरे में खड़ा करते रहने वाले ‘आप’ के प्रवक्ता आशुतोष से जब इस मामले पर बात करने की कोशिस की गई तो उन्होंने कहा कि, उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।

 

ऐसे में यह सवाल उठाना लाजमी है कि, क्या दूसरी पार्टियों के दागदार नेता आप में शामिल होते ही पाक साफ हो जाते हैं? जानकारी मिली है कि, बेटी करीब 3 वर्षों पहले बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डिवेलपमेंट अथॉरिटी (BIADA) ने करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव नेताओं के रिश्तेदारों को अलॉट कर दी थी। इसको लेकर बिहार की राजनीति में जबरदस्त बवाल मचा था।

 

कुछ राजनीतिक लोगों ने इसे बिहार का 2जी घोटाला करार दिया था। मंत्री परवीन अमानुल्लाह की बेटी रहमत फातिमा अमानुल्लाह को भी 87,120 वर्ग फुट जमीन दी गई थी। करोड़ों की यह जमीन कौड़ियों के भाव पर दी गई थी। हालांकि, इसमें जिन लोगों को जमीन दी गई थी उनमें बड़ी संख्या में उस वक्त की नीतीश सरकार में शामिल नेताओं के नजदीकी रिश्तेदार शामिल थे। इसमें जेडीयू के साथ-साथ बीजेपी के भी कई नेता शामिल थे।

 

जब मामले का खुलासा हुआ तो राज्य की विपक्षी पार्टियों ने मामले की सीबीआई जांच करने की भी मांग की थी। लेकिन, सूबे की सरकार ने विपक्षियों की मांग को ख़ारिज कर दिया था। उन्होंने चीफ सेक्रेटरी अनुप मुखर्जी को जांच का जिम्मा सौंप दिया। जैसा कि सभी विभागीय जांचों का हश्र होता है, इसका भी वैसा ही हश्र हुआ और सभी आरोपियों को क्लीन चिट मिल गई।

 

ज्ञात हो कि, बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डिवेलपमेंट अथॉरिटी का गठन प्रदेश में औद्योगिकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, लेकिन अधिकांश जमीन उद्योगपतियों की जगह रसूखदार लोगों के बच्चों को अलॉट कर दिया गया। ऐसे में केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पर सवाल उठना लाजिमी है। ज्ञात हो कि, ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश में भी सामने आया था जहां जहां पर नीरा यादव ने अपनी बेटियों को जमीन अलॉट कराई थी। उस घोटाले की सीबीआई जांच हुई थी, जिसमें नीरा को दोषी पाया गया था। उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।

 

हाजीपुर के विदुपुर ब्लॉंक की सीडीपीओ कविता कुमारी ने परवीन अमानुल्लाह और उनके सहयोगियों पर मारपीट करने और 10 लाख रुपये रिश्वत मांगने का मुकदमा दर्ज कराया है। यदि अंदरुनी सूत्रों की माने तो परवीन ने पुलिस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी करती रही, लेकिन जब यह मामला मीडिया में जोर पकड़ने लगा तो इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई।

 

सूत्रों द्वारा यह भी जानकरी मिली है कि, परवीन के काम काम करने का तरीका यही था। वह औचक निरीक्षण करने पहुंचतीं और सीडीपीओ को निलंबित कर देती थीं। इसके बाद लाखों रुपये लेकर ही उनका निलंबन रद्द करती थीं। वसूली के लिए उन्होंने खास लोग रखे थे।

 

जब इन सभी मुद्दों की बावत परवीन से बात की गई तो उन्होंने इन आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया। परवीन ने कहा कि जब मैंने कविता के खिलाफ कार्रवाई की तो उन्होंने मुझ पर झूठे इल्जाम लगाए। परवीन का कहना है कि मैं जब मंत्री बनी थी तो आंगनबाड़ी के सिर्फ 5 पर्सेंट सेंटर चलते थे,जबकि अब 99 फीसदी सेंटर सुचारु ढंग से चलते हैं।

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